आमको सिमको शहीदों को आज तक नहीं मिला उचित सम्मान

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सुंदरगढ ,२५ /०४ (संधान न्यूज़): सुंदरगढ जिले के रायबोगा थाना अंतर्गत आमको सिमको गांव में 25 अप्रैल 1939 को ईस्ट इंडिया कंपनी के सैनिकों की अंधाधुंध फायरिग में 49 आदिवासियों की जान चली गई एवं 90 से अधिक लोग जख्मी हुए थे। यह घटना पंजाब के जलियावाला बाग गोलीकांड से कम नहीं है। लेकिन आंदोलन का नेतृत्व कर रहे निर्मल मुंडा को केवल 15 अगस्त 1972 को पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने ताम्रपत्र देकर स्वाधीनता सेनानी का सम्मान दिया। इसके अलावा अन्य लोगों को घटना के 81 साल बाद भी न तो उचित सम्मान मिला न स्वाधीनता सेनानी का दर्जा। राज्य सरकार की ओर से शहीद स्थल को पर्यटन स्थल में तब्दील करने की घोषणा की जा चुकी है। हर साल आमको सिमको शहीद स्मारक कमेटी की ओर से शहादत दिवस मनाया जाता है और अंग्रेजों की गोली का शिकार हुए लोगो के लिए सम्मान मांगा जाता है लेकिन सुफल आज तक नहीं मिला है।

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